नानक नाम जहाज है, चढ़े सो उतरे पार।
जो श्रद्धा कर सेवदे, गुरु पार उतारणहार।
गुरु नानक देव जी का नाम (ईश्वर का स्मरण) एक मजबूत जहाज के समान है, जो दुखों के समुद्र को पार करने का माध्यम है। जो भी इस भक्ति-रूपी जहाज पर श्रद्धा के साथ चढ़ता है, वह जीवन-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है। जो भक्त गुरु पर श्रद्धा रखते हैं और उनके नाम का सिमरन करते हैं, गुरु स्वयं उन्हें पार उतारते हैं।